देहरादून/मसूरी: पर्यटन और यात्रा सीजन को ध्यान में रखते हुए केम्प्टी लाइब्रेरी मार्ग पर बुधवार को एक संयुक्त मॉक ड्रिल का आयोजन किया गया। इस अभ्यास का उद्देश्य सड़क दुर्घटनाओं के दौरान त्वरित राहत एवं बचाव कार्य को और अधिक प्रभावी बनाना था, ताकि वास्तविक स्थिति में जान-माल की हानि को न्यूनतम किया जा सके।
इस मॉक ड्रिल में एसडीआरएफ, उत्तराखंड जल संस्थान, लोक निर्माण विभाग, स्वास्थ्य विभाग और पुलिस बल ने मिलकर हिस्सा लिया। सभी विभागों ने आपसी तालमेल के साथ एक काल्पनिक दुर्घटना पर प्रतिक्रिया देते हुए घायलों को सुरक्षित बाहर निकालने और उन्हें तुरंत चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराने का अभ्यास किया।
बस दुर्घटना का बनाया गया परिदृश्य
ड्रिल के दौरान एक बस के खाई में गिरने का काल्पनिक दृश्य तैयार किया गया। इस स्थिति में बचाव दल ने तेजी से कार्रवाई करते हुए घायलों को बाहर निकाला और 108 एंबुलेंस सेवा के माध्यम से अस्पताल भेजने की प्रक्रिया को अंजाम दिया।
समन्वय और सुरक्षा उपकरणों की जांच
इस अभ्यास के दौरान विभिन्न विभागों के बीच बेहतर समन्वय देखने को मिला। साथ ही, आपदा के समय उपयोग में आने वाले सुरक्षा उपकरणों और संसाधनों की भी जांच की गई, ताकि किसी भी वास्तविक दुर्घटना के समय तुरंत और प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके।
अधिकारियों ने क्या कहा
सीओ जगदीश पंत ने बताया कि मॉक ड्रिल के तहत बस दुर्घटना की स्थिति बनाकर सभी विभागों ने राहत और बचाव कार्य में अपनी भूमिका निभाई।
वहीं, लोक निर्माण विभाग के सहायक अभियंता शिवराज सिंह लोदियाल ने कहा कि सूचना मिलते ही सभी विभाग मौके पर पहुंचे और संयुक्त रूप से बचाव कार्य का अभ्यास किया गया।
नायब तहसीलदार उपेंद्र राणा ने भी बताया कि इस तरह के अभ्यास से आपदा प्रबंधन की तैयारियों को मजबूत किया जाता है और सभी विभागों को मौके पर काम करने का अनुभव मिलता है।
क्यों जरूरी है ऐसी मॉक ड्रिल?
पर्यटन और यात्रा सीजन में पहाड़ी क्षेत्रों में दुर्घटनाओं की संभावना बढ़ जाती है। ऐसे में इस तरह की मॉक ड्रिल न सिर्फ प्रशासन की तैयारियों को परखती है, बल्कि आपदा के समय तेज और प्रभावी प्रतिक्रिया सुनिश्चित करने में भी मदद करती है।
