रिपोर्टर: धर्मेंद्र सिंह
उत्तराखंड हाईकोर्ट ने मसूरी में पेड़ों के अवैध कटान के मामले में सख्त रुख अपनाते हुए नगर पालिका को फटकार लगाई है।
एमपीजी कॉलेज की भूमि पर बिना वन विभाग की अनुमति के सड़क और खेल मैदान निर्माण के लिए पेड़ काटे जाने के मामले में कोर्ट ने तत्काल प्रभाव से किसी भी प्रकार के पेड़ कटान पर रोक लगा दी है।
याचिका के अनुसार, नगर पालिका द्वारा एमपीजी कॉलेज परिसर में बांज सहित कई बहुमूल्य पेड़ों को बिना अनुमति काटा गया।
Ban Oak Tree (बांज) के पेड़ों की सुरक्षा के लिए कानून मौजूद होने के बावजूद आवश्यक अनुमति नहीं ली गई, जो गंभीर लापरवाही मानी जा रही है।
यह मामला छात्र संघ अध्यक्ष और पर्यावरण प्रेमी Pravesh Rana द्वारा दायर जनहित याचिका के बाद सामने आया।
याचिकाकर्ता ने कोर्ट में पेड़ों के कटान से जुड़ी तस्वीरें भी प्रस्तुत कीं, जिस पर सुनवाई के दौरान वन विभाग ने भी पुष्टि की कि तस्वीरें उसी स्थान की हैं।
सुनवाई के दौरान कोर्ट ने सवाल उठाया कि आखिर किसकी अनुमति से पेड़ काटे गए।
हाईकोर्ट ने नगर पालिका, राज्य सरकार और वन विभाग को चार सप्ताह के भीतर जवाब दाखिल करने के निर्देश दिए हैं।
याचिकाकर्ता Pravesh Rana ने कोर्ट के फैसले का स्वागत करते हुए इसे मसूरी के युवाओं और छात्रों की जीत बताया।
उन्होंने कहा कि पर्यावरण संरक्षण के लिए यह एक महत्वपूर्ण कदम है और इससे भविष्य में ऐसी घटनाओं पर रोक लगेगी।
मसूरी में पेड़ों के अवैध कटान पर हाईकोर्ट की सख्ती पर्यावरण संरक्षण के प्रति न्यायपालिका की गंभीरता को दर्शाती है।
यह मामला प्रशासनिक जवाबदेही और कानूनी प्रक्रियाओं के पालन की आवश्यकता को भी उजागर करता है। आने वाले समय में इस मामले पर सभी की नजर बनी रहेगी।
