रिपोर्ट: सुभाष चंद
उत्तराखंड के खटीमा में गेहूं की कटाई शुरू होते ही गल्ला मंडी में गतिविधियां तेज हो गई हैं। किसान बड़ी संख्या में अपना अनाज लेकर मंडी पहुंच रहे हैं, लेकिन सरकारी खरीद प्रक्रिया शुरू न होने से उनकी चिंता बढ़ती जा रही है।
मंडी में हलचल, लेकिन तौल शुरू नहीं
खटीमा गल्ला मंडी में सरकारी कांटे तो लगा दिए गए हैं, लेकिन अब तक गेहूं की सरकारी तौल शुरू नहीं हो सकी है। इसके पीछे वारदाने (बोरों) की कमी और स्पष्ट सरकारी आदेशों का अभाव मुख्य कारण बताया जा रहा है।
किसानों में असमंजस और नाराजगी
मंडी में बड़ी संख्या में किसान इकट्ठा हुए और अपनी समस्याएं उठाईं। भारतीय किसान यूनियन के जिलाध्यक्ष मनजिंदर सिंह भुल्लर के नेतृत्व में किसानों ने प्रशासन के सामने अपनी मांगें रखीं।
उन्होंने कहा कि अगर सभी कांटे सिर्फ मंडी में लगाए जाएंगे, तो दूर-दराज के गांवों के किसानों को भारी परेशानी होगी।
उनकी मांग है कि:
- मंडी में केवल 7 किलोमीटर के दायरे के किसानों का तौल हो
- बाकी गांवों में स्थानीय स्तर पर खरीद केंद्र स्थापित किए जाएं
प्रशासन की तैयारी पर उठे सवाल
प्रशासनिक स्तर पर तैयारियों को लेकर विरोधाभासी स्थिति सामने आ रही है।
खटीमा के एसएमआई अधिकारी के.सी. आर्य के अनुसार, अब तक 35 कांटे लगाए जा चुके हैं और कुछ को गांवों में स्थापित करने की योजना है। साथ ही किसानों से जल्द पंजीकरण कराने की अपील की गई है।
सरकारी आदेश और संसाधनों की कमी
क्रय केंद्र अधिकारी अंकित सिंह राणा ने स्पष्ट किया कि अभी तक
- गेहूं खरीद शुरू करने का कोई आधिकारिक आदेश नहीं मिला है
- वारदाना (बोरे) भी उपलब्ध नहीं हैं
उन्होंने कहा कि जैसे ही आदेश और संसाधन मिलेंगे, खरीद प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी।
किसानों की बढ़ती चिंता
मंडी में मौजूद किसानों का कहना है कि फसल तैयार है और वे समय पर बिक्री करना चाहते हैं। लेकिन मौजूदा हालात में उन्हें इंतजार करना पड़ रहा है, जिससे आर्थिक दबाव बढ़ रहा है।
