सीमांत क्षेत्र खटीमा में भ्रष्टाचार और भू-माफियाओं के खिलाफ आवाज उठाना एक बुजुर्ग समाजसेवी को भारी पड़ रहा है। तहसील परिसर में पिछले 15 दिनों से धरने पर बैठे ओमप्रकाश वैश्य ने अब शासन-प्रशासन के खिलाफ आर-पार की लड़ाई का ऐलान कर दिया है।
प्रशासन की अनदेखी से नाराज होकर उन्होंने अब आमरण अनशन (भूख हड़ताल) पर जाने की चेतावनी दी है।
ओमप्रकाश वैश्य खटीमा तहसील परिसर में उपजिलाधिकारी कार्यालय के बाहर पिछले 15 दिनों से क्रमिक अनशन पर बैठे हैं।
उनका आरोप है कि उनकी मांगों पर अब तक कोई सुनवाई नहीं हुई, जिससे वे मानसिक और शारीरिक रूप से परेशान हैं।
समाजसेवी ने उपजिलाधिकारी को सौंपे 6 सूत्रीय मांग पत्र में स्पष्ट कहा है कि यदि 19 अप्रैल तक उनकी मांगों पर कार्रवाई नहीं की गई, तो वे क्रमिक अनशन समाप्त कर आमरण अनशन शुरू करेंगे।
ओमप्रकाश वैश्य का कहना है कि पीलीभीत रोड स्थित आहूजा पेट्रोल पंप के सामने की ‘बंजर’ जमीन, जिसे 1966 में शासन द्वारा नीलाम किया गया था, आज तक उन्हें नहीं मिल सकी है।
उन्होंने मांग की है कि अवैध कब्जाधारकों को हटाकर उन्हें उनका मालिकाना हक दिलाया जाए।
मांग पत्र में यह भी कहा गया है कि:
बुजुर्ग समाजसेवी की हालत बिगड़ने के बावजूद प्रशासन की ओर से कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है, जिससे स्थानीय लोगों में भी नाराजगी बढ़ रही है।
अब देखना होगा कि 19 अप्रैल से पहले प्रशासन इस मामले में कोई कार्रवाई करता है या एक बुजुर्ग को अपनी मांगों के लिए आमरण अनशन पर जाना पड़ेगा।
यह मामला खटीमा में प्रशासनिक कार्यप्रणाली और भू-माफियाओं के खिलाफ कार्रवाई को लेकर बड़ा सवाल खड़ा कर रहा है।
