ऋषिकेश | संवाददाता: सागर रस्तोगी
तीर्थनगरी ऋषिकेश में आज अक्षय तृतीया के पावन अवसर पर आस्था का अद्भुत संगम देखने को मिला। विश्व प्रसिद्ध श्री भरत मंदिर में सुबह से ही श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। मंदिर परिसर में भक्तों की लंबी कतारें लगी रहीं और पूरे वातावरण में भक्ति का रंग छाया रहा।
साल में एक बार मिलता है विशेष दर्शन का अवसर
माना जाता है कि वर्ष में केवल अक्षय तृतीया के दिन ही श्रद्धालुओं को भगवान भरत के चरणों के दर्शन का विशेष सौभाग्य प्राप्त होता है। यही वजह है कि इस दिन यहां हजारों की संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं।
108 परिक्रमा का विशेष महत्व
धार्मिक मान्यता के अनुसार, जो भक्त इस दिन भगवान भरत की 108 परिक्रमा करता है, उसे बद्रीनाथ धाम में भगवान बद्री विशाल के दर्शन के समान पुण्य प्राप्त होता है। इसी आस्था के चलते चारधाम यात्रा पर जाने वाले अधिकतर श्रद्धालु अपनी यात्रा की शुरुआत यहीं से करते हैं।
मंदिर का ऐतिहासिक महत्व
मंदिर के महंत वत्सल शर्मा के अनुसार, इस मंदिर की स्थापना 12वीं शताब्दी में आदि गुरु शंकराचार्य ने की थी। मंदिर के गर्भगृह में भगवान विष्णु की एक अद्भुत प्रतिमा स्थापित है, जो एक ही शालिग्राम पत्थर से निर्मित मानी जाती है।
चूरमे का भोग और विशेष पूजा
अक्षय तृतीया के अवसर पर श्रद्धालु भगवान को विशेष रूप से चूरमे का भोग अर्पित कर रहे हैं और पूजा-अर्चना कर सुख-समृद्धि की कामना कर रहे हैं।
चारधाम यात्रा की भी शुरुआत
इसी शुभ दिन पर गंगोत्री धाम और यमुनोत्री धाम के कपाट भी खोल दिए गए हैं, जिससे चारधाम यात्रा का औपचारिक आगाज हो गया है।
घर बैठे भी कर सकते हैं दर्शन
जो श्रद्धालु किसी कारणवश मंदिर नहीं पहुंच पाए हैं, वे घर बैठे भगवान भरत के इस दिव्य स्वरूप का स्मरण कर भी पुण्य लाभ प्राप्त कर सकते हैं।
निष्कर्ष
ऋषिकेश का श्री भरत मंदिर आज श्रद्धा और आस्था का केंद्र बना हुआ है। अक्षय तृतीया के इस पावन अवसर पर उमड़ी भक्तों की भीड़ यह दर्शाती है कि भारतीय संस्कृति में धार्मिक परंपराओं का महत्व आज भी उतना ही गहरा है।
