उत्तराखंड के रुड़की के लंढौरा क्षेत्र में दहेज प्रथा के खिलाफ एक अहम पहल देखने को मिली। मदरसा इमदादुल इस्लाम में आयोजित जिला स्तरीय बैठक में समाज के प्रमुख लोगों ने एकजुट होकर दहेज प्रथा पर पूरी तरह रोक लगाने की अपील की।
दहेज के खिलाफ सख्त संदेश
बैठक में जमीअत उलेमा-ए-हिंद के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष मुफ्ती रियासत अली ने कहा कि दहेज प्रथा समाज के लिए एक बड़ी बुराई बन चुकी है।
उन्होंने सुझाव दिया कि दहेज में होने वाले फिजूल खर्च को रोककर उसी धन को बच्चों की अच्छी शिक्षा और भविष्य निर्माण में लगाया जाना चाहिए।
मध्यम और गरीब वर्ग पर बढ़ता दबाव
मुफ्ती रियासत अली ने कहा कि दहेज का बढ़ता चलन खासकर मध्यम और गरीब वर्ग के लिए गंभीर समस्या बन गया है।
उन्होंने यह भी कहा कि अगर माता-पिता अपनी बेटियों को संपत्ति में हिस्सा देते हैं, तो यह धार्मिक दृष्टि से भी सही है।
सादगी से शादी पर जोर
बैठक में कई वक्ताओं ने शादियों में सादगी अपनाने की अपील की:
- मास्टर अहसान अली ने बारात में कम लोगों को ले जाने की बात कही
- विधायक फुरकान अहमद ने समाज के जिम्मेदार लोगों से आगे आकर इस कुप्रथा को खत्म करने की अपील की
- नगर पंचायत अध्यक्ष डॉ. मोहम्मद नसीम ने बैंड-बाजा, डीजे और सगाई जैसी रस्मों में फिजूल खर्च पर रोक लगाने की बात कही
मौलाना नवाब अली और एडवोकेट अब्दुल शमी ने भी कहा कि शादी-ब्याह में होने वाली महंगी और गैर-जरूरी रस्मों पर रोक लगाना बेहद जरूरी है।
हर गांव में बनेगी कमेटी
बैठक के अंत में निर्णय लिया गया कि दहेज प्रथा को जड़ से खत्म करने के लिए हर गांव में कमेटियों का गठन किया जाएगा, जो लोगों को जागरूक करने का काम करेंगी।
समाज सुधार की दिशा में कदम
इस बैठक को समाज सुधार की दिशा में एक सकारात्मक पहल माना जा रहा है, जहां शिक्षा, सादगी और जागरूकता के माध्यम से दहेज जैसी कुप्रथा को खत्म करने का संकल्प लिया गया।
