रिपोर्टर: सचिन कुमार
उत्तराखंड सरकार ने स्कूली शिक्षा में पारदर्शिता और समानता लाने के लिए बड़ा कदम उठाया है। अब प्रदेश के सभी निजी, सरकारी और अशासकीय विद्यालयों में केवल NCERT (एनसीईआरटी) का पाठ्यक्रम ही अनिवार्य रूप से लागू होगा।
माध्यमिक शिक्षा निदेशक Mukul Kumar Sati ने साफ कहा है कि नियमों का उल्लंघन करने वाले स्कूलों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
शिक्षा विभाग के अनुसार, लंबे समय से यह शिकायत मिल रही थी कि कई निजी स्कूल अभिभावकों पर महंगी निजी प्रकाशकों की किताबें खरीदने का दबाव डालते हैं।
इससे अभिभावकों पर अनावश्यक आर्थिक बोझ बढ़ता था। अब सरकार के इस फैसले के बाद इस तरह की मनमानी पर रोक लगेगी।
शिक्षा विभाग ने सभी जिलों के मुख्य शिक्षा अधिकारियों (CEO) को अपने-अपने क्षेत्रों में औचक निरीक्षण करने के निर्देश दिए हैं।
यह सुनिश्चित किया जाएगा कि सभी स्कूल निर्धारित नियमों का पालन करें और केवल NCERT पाठ्यक्रम ही लागू करें।
निदेशक Mukul Kumar Sati ने चेतावनी दी है कि यदि कोई स्कूल अभिभावकों को अन्य प्रकाशकों की किताबें खरीदने के लिए मजबूर करता पाया गया, तो उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
गंभीर मामलों में स्कूल का लाइसेंस भी रद्द किया जा सकता है।
सरकार के इस फैसले से अभिभावकों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है, क्योंकि अब उन्हें महंगी किताबें खरीदने के लिए मजबूर नहीं किया जाएगा।
साथ ही, प्रदेश में एक समान शिक्षा व्यवस्था लागू करने की दिशा में यह एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
उत्तराखंड में शिक्षा व्यवस्था को पारदर्शी और किफायती बनाने के लिए सरकार का यह फैसला अहम साबित हो सकता है।
NCERT पाठ्यक्रम को अनिवार्य करने से न केवल शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार होगा, बल्कि अभिभावकों पर पड़ने वाला आर्थिक बोझ भी कम
