कारगिल विजय दिवस के अवसर पर कोटद्वार में आयोजित वीर सैनिक सम्मान समारोह में सैनिक कल्याण मंत्री गणेश जोशी ने पूर्व सैनिकों, वीर नारियों और वीर माताओं को सम्मानित किया। कार्यक्रम में उन्होंने कहा कि “उत्तराखंड के डीएनए में देशभक्ति बसती है” और राज्य की सैन्य परंपरा पूरे देश के लिए गर्व का विषय है।
कोटद्वार स्थित एक निजी वेडिंग प्वाइंट में आयोजित इस समारोह में स्थानीय विधायक एवं विधानसभा अध्यक्ष ऋतु खंडूरी ने अध्यक्षता की, जबकि कैबिनेट मंत्री सतपाल महाराज भी विशेष रूप से उपस्थित रहे। कार्यक्रम के दौरान वरिष्ठ पत्रकार मनोज इष्टवाल द्वारा लिखित पुस्तक “कण्वाश्रम (भरत से भारतवर्ष)” का विमोचन भी किया गया।
सैनिकों के बीच खुद को भाई और बेटा मानते हैं: गणेश जोशी
अपने संबोधन में सैनिक कल्याण मंत्री गणेश जोशी ने कहा कि जब भी उन्हें सैनिकों और पूर्व सैनिकों के बीच आने का अवसर मिलता है, तो वे मंत्री के रूप में नहीं बल्कि एक भाई और बेटे के रूप में उनके बीच आते हैं। उन्होंने कहा कि उनके जीवन और सार्वजनिक सेवा में उनकी सैन्य पृष्ठभूमि का महत्वपूर्ण योगदान रहा है।
उन्होंने कहा कि उत्तराखंड की पहचान केवल देवभूमि के रूप में ही नहीं, बल्कि वीरों की भूमि के रूप में भी है। राज्य का लगभग 17.5 प्रतिशत सैन्य योगदान इस बात का प्रमाण है कि यहां के परिवारों का सेना से गहरा जुड़ाव रहा है।
सैनिकों के सम्मान में केंद्र सरकार के फैसलों का किया उल्लेख
गणेश जोशी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सैनिकों के सम्मान और कल्याण के लिए कई ऐतिहासिक निर्णय लिए गए हैं। उन्होंने वन रैंक वन पेंशन (OROP), नेशनल वॉर मेमोरियल के निर्माण, रक्षा बजट में वृद्धि और सीमावर्ती क्षेत्रों में आधारभूत ढांचे को मजबूत करने जैसे कदमों का उल्लेख करते हुए कहा कि केंद्र सरकार सैनिकों के हितों के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।
शहीदों के परिवारों के लिए राज्य सरकार की पहल
सैनिक कल्याण मंत्री ने बताया कि उत्तराखंड सरकार ने शहीद सैनिकों के परिजनों के हित में कई महत्वपूर्ण फैसले लिए हैं। शहीदों के आश्रितों को मिलने वाली अनुग्रह राशि में कई गुना वृद्धि की गई है। इसके साथ ही परमवीर चक्र से लेकर ‘मेंशन इन डिस्पैच’ तक सभी वीरता पुरस्कार विजेताओं को मिलने वाली एकमुश्त और वार्षिक सम्मान राशि भी बढ़ाई गई है।
उन्होंने बताया कि राज्य सरकार ने शहीद सैनिकों के परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी देने का निर्णय लिया है। अब तक 28 शहीदों के आश्रितों को सरकारी सेवा में नियुक्त किया जा चुका है। साथ ही सरकारी नौकरी के लिए आवेदन की समय-सीमा 2 वर्ष से बढ़ाकर 5 वर्ष कर दी गई है।
वीरता पुरस्कार विजेताओं को मुफ्त बस यात्रा
गणेश जोशी ने कहा कि वीरता पुरस्कार प्राप्त सैनिकों और पूर्व सैनिकों को उत्तराखंड परिवहन निगम की बसों में निःशुल्क यात्रा की सुविधा भी दी जा रही है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार सैनिकों, पूर्व सैनिकों और उनके आश्रितों के सम्मान और कल्याण के लिए लगातार काम कर रही है और भविष्य में भी यह प्रयास जारी रहेंगे।
समारोह को विधानसभा अध्यक्ष ऋतु खंडूरी और कैबिनेट मंत्री सतपाल महाराज ने भी संबोधित किया तथा देश की रक्षा में योगदान देने वाले सैनिकों के प्रति सम्मान व्यक्त किया।
