उत्तराखण्ड से एक बड़ी खबर सामने आई है। प्रदेश के विकास कार्यों की रीढ़ माने जाने वाले डिप्लोमा इंजीनियरों ने सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। उत्तराखण्ड डिप्लोमा इंजीनियर्स महासंघ के आह्वान पर 23 मार्च 2026 से पूरे राज्य में अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू हो गई है।
हजारों इंजीनियर हड़ताल पर
राज्य के विभिन्न विभागों जैसे PWD, सिंचाई, लघु सिंचाई और पेयजल निगम के 4,000 से अधिक जूनियर इंजीनियर और सहायक अभियंता कलमबंद हड़ताल पर चले गए हैं।
देहरादून से लेकर अल्मोड़ा, नैनीताल और बागेश्वर तक जिला मुख्यालयों में विरोध प्रदर्शन जारी है।
क्या हैं इंजीनियरों की प्रमुख मांगें?
महासंघ के प्रांतीय अध्यक्ष आर.सी. शर्मा और महासचिव वीरेंद्र गुसाईं के अनुसार सरकार लंबे समय से उनकी जायज मांगों की अनदेखी कर रही है। प्रमुख मांगें इस प्रकार हैं:
- कनिष्ठ अभियंताओं की वेतन विसंगतियों का समाधान
- 2013 के बाद नियुक्त इंजीनियरों को 10 साल सेवा के बाद ₹5400 ग्रेड पे का लाभ
- पदोन्नति प्रक्रिया में सुधार और न्यूनतम तीन प्रमोशन सुनिश्चित करना
- पुरानी पेंशन योजना की बहाली
- पेयजल निगम और जल संस्थान का एकीकरण व राजकीयकरण
वार्ता विफल, हड़ताल का फैसला
महासंघ का कहना है कि सरकार के साथ कई दौर की वार्ताएं हो चुकी हैं, लेकिन कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया। 24 फरवरी को मुख्यमंत्री से हुई बैठक में आश्वासन मिला था, लेकिन अब तक कोई शासनादेश जारी नहीं हुआ।
1 अप्रैल से और बढ़ सकता है संकट
इंजीनियरों ने चेतावनी दी है कि यदि 31 मार्च तक उनकी मांगें पूरी नहीं हुईं, तो 1 अप्रैल से बिजली, पानी और अन्य आवश्यक सेवाओं से जुड़े अभियंता भी हड़ताल में शामिल हो जाएंगे। इससे प्रदेश में स्थिति और गंभीर हो सकती है।
विकास कार्यों पर पड़ा असर
इस हड़ताल के चलते उत्तराखण्ड में चल रहे करोड़ों रुपये के निर्माण और विकास कार्य ठप पड़ गए हैं। अब सभी की नजर पुष्कर सिंह धामी सरकार पर है कि वह इस गतिरोध को खत्म करने के लिए क्या कदम उठाती है।
