रिपोर्टर: प्रदीप श्रीवास्तव
जसपुर में मूर्ति विवाद खत्म, पूर्व और वर्तमान विधायक आमने-सामने नहीं आएंगे
स्लोगन: मूर्ति विवाद समाप्त, पूर्व एवं वर्तमान विधायक नहीं आएंगे आमने-सामने
स्थान: जसपुर (उधम सिंह नगर)
रिपोर्टर: प्रदीप श्रीवास्तव
5 दिन बाद खत्म हुआ हाई-प्रोफाइल विवाद
उत्तराखंड के उधम सिंह नगर जिले के जसपुर में बीते चार दिनों से चल रहा मूर्ति विवाद आखिरकार पांचवें दिन समाप्त हो गया है। इस विवाद में सत्ता पक्ष के पूर्व विधायक डॉ. शैलेंद्र मोहन सिंघल और वर्तमान कांग्रेस विधायक आदेश सिंह चौहान आमने-सामने थे, लेकिन अब दोनों पक्षों के बीच टकराव टल गया है।
क्या था पूरा मामला?
यह पूरा मामला 15 अप्रैल 2026 का है, जब जसपुर नगर के ठाकुर मंदिर चौराहे के पास कांग्रेस विधायक आदेश सिंह चौहान अपने समर्थकों के साथ वीरांगना महारानी लक्ष्मीबाई की मूर्ति स्थापित करने के लिए खुदाई कार्य करा रहे थे।
इसी दौरान पूर्व विधायक डॉ. शैलेंद्र मोहन सिंघल भी अपने समर्थकों के साथ मौके पर पहुंचे और इस कार्य का विरोध किया। देखते ही देखते माहौल तनावपूर्ण हो गया और दोनों पक्षों के समर्थकों के बीच जमकर हंगामा और धक्का-मुक्की शुरू हो गई।
स्थिति इतनी बिगड़ गई कि दोनों विधायक भी आमने-सामने आ गए। सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और किसी तरह हालात को काबू में किया।
विवाद ने पकड़ा था तूल
घटना के बाद यह विवाद लगातार बढ़ता गया।
- वर्तमान विधायक ने उपजिलाधिकारी से मुलाकात की
- पूर्व विधायक ने जनाक्रोश रैली निकाली
- दोनों पक्षों के बीच बयानबाजी तेज हो गई
स्थिति तब और गंभीर हो गई जब पूर्व विधायक ने 20 अप्रैल 2026 को शाम 5 बजे बीएसबी इंटर कॉलेज में आमने-सामने आने की चेतावनी दी। जवाब में वर्तमान विधायक ने भी चुनौती स्वीकार करते हुए तय समय से पहले पहुंचने की घोषणा कर दी थी।
ऐसे हुआ विवाद का समाधान
मंगलवार दोपहर करीब 2:30 बजे प्रांतीय उद्योग व्यापार मंडल कार्यालय, जसपुर में एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई।
यह बैठक व्यापार मंडल अध्यक्ष हरिओम सिंह अरोड़ा के नेतृत्व में हुई, जिसमें:
- दोनों विधायकों के प्रतिनिधि
- व्यापारी वर्ग
- सामाजिक संगठनों के सदस्य
शामिल हुए। सर्वसम्मति से प्रेस वार्ता कर इस पूरे विवाद को समाप्त करने का निर्णय लिया गया। साथ ही, इस फैसले की जानकारी स्थानीय पुलिस प्रशासन को भी दे दी गई।
निष्कर्ष
लगातार बढ़ रहे इस राजनीतिक और सामाजिक विवाद का शांतिपूर्ण समाधान स्थानीय व्यापार मंडल और सामाजिक संगठनों की पहल से संभव हो सका। इससे क्षेत्र में संभावित तनाव और टकराव टल गया है।
