मध्य पूर्व में जारी युद्ध का असर अब भारत के शहरों तक दिखाई देने लगा है। उत्तराखंड के रुड़की और आसपास के क्षेत्रों में गैस संकट गहराता जा रहा है, जिससे होटल और रेस्टोरेंट कारोबार बुरी तरह प्रभावित हो रहा है।
ढाबों पर पड़ा सीधा असर
नारसन स्थित दिल्ली-हरिद्वार मार्ग पर कई ढाबों में गैस की किल्लत के चलते चूल्हे ठंडे पड़ गए हैं। कई ढाबे बंद हो चुके हैं, जबकि कुछ संचालक मजबूरी में भट्टी पर खाना बना रहे हैं।
महंगे सिलेंडर और कम सप्लाई
होटल और रेस्टोरेंट संचालकों का कहना है कि:
- कॉमर्शियल गैस सिलेंडर उपलब्ध नहीं हो रहे
- जो मिल रहे हैं, वे काफी महंगे हैं
- किचन संचालन में दिक्कतें बढ़ रही हैं
इसका असर सीधे ग्राहकों को मिलने वाले खाने की गुणवत्ता और विकल्पों पर पड़ रहा है।
फूड आइटम्स पर असर, बिक्री में गिरावट
गैस की कमी के कारण कई जगहों पर चाइनीज फूड जैसे लोकप्रिय व्यंजन बनना बंद हो गए हैं, जिससे बिक्री में भारी गिरावट आई है। इससे छोटे कारोबारियों के लिए खर्च निकालना भी मुश्किल हो गया है।
यात्रियों की संख्या में कमी
ढाबा संचालकों के अनुसार, अन्य राज्यों से आने वाले यात्री भी अब यात्रा करने से बच रहे हैं। उन्हें पेट्रोल-डीजल की संभावित किल्लत का डर सता रहा है, जिसके चलते हाईवे पर आवाजाही कम हो गई है।
रोजी-रोटी पर संकट
इस स्थिति का असर केवल ढाबा मालिकों पर ही नहीं, बल्कि वहां काम करने वाले कर्मचारियों और वेंडरों की आजीविका पर भी पड़ रहा है। कई ढाबे खाली पड़े हैं और संचालक ग्राहकों के इंतजार में बैठे हैं।
चेतावनी: बंद हो सकते हैं ढाबे
संचालकों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द समाधान नहीं निकला, तो हाईवे पर स्थित कई होटल और ढाबे बंद होने की कगार पर पहुंच सकते हैं।
