रिपोर्ट: सचिन कुमार
उत्तराखंड के प्रसिद्ध केदारनाथ धाम में वीआईपी दर्शन व्यवस्था को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। तीर्थ पुरोहितों ने इस व्यवस्था के खिलाफ खुलकर विरोध जताया है और इसे आस्था के साथ भेदभाव बताया है।
पुरोहितों का कहना है कि बाबा केदार के दरबार में सभी श्रद्धालु समान हैं, ऐसे में वीआईपी कल्चर लागू करना धार्मिक भावनाओं के खिलाफ है। उन्होंने प्रदर्शन करते हुए आरोप लगाया कि वीआईपी व्यवस्था के चलते आम श्रद्धालुओं को घंटों लंबी कतारों में इंतजार करना पड़ता है, जबकि कुछ विशेष लोगों को सीधे दर्शन की सुविधा मिल जाती है।
तीर्थ पुरोहितों ने प्रशासन से मांग की है कि वीआईपी दर्शन व्यवस्था को पूरी तरह समाप्त किया जाए और सभी श्रद्धालुओं के लिए समान दर्शन प्रणाली लागू की जाए, ताकि किसी भी प्रकार का भेदभाव न हो।
वहीं इस पूरे मामले पर महेंद्र भट्ट ने तीर्थ पुरोहितों के आरोपों को खारिज किया है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि धाम में किसी प्रकार का वीआईपी दर्शन नहीं हो रहा है और बाबा केदार सभी भक्तों को समान रूप से दर्शन दे रहे हैं।
महेंद्र भट्ट ने आरोप लगाया कि इस मुद्दे को बेवजह राजनीतिक रंग दिया जा रहा है। उनका कहना है कि प्रशासन द्वारा की गई व्यवस्थाएं सभी श्रद्धालुओं के लिए समान हैं और किसी के साथ भेदभाव नहीं किया जा रहा।
इस विवाद के बीच अब सभी की नजर प्रशासन पर है कि वह इस मुद्दे पर क्या रुख अपनाता है और श्रद्धालुओं की सुविधा को कैसे संतुलित करता है।
