पूर्णागिरि मेले में मुंडन संस्कार के नाम पर अतिरिक्त वसूली का आरोप, श्रद्धालुओं ने उठाए सवाल
रिपोर्ट: सुभाष चंद
उत्तर भारत के प्रसिद्ध सिद्धपीठ माँ पूर्णागिरि धाम मेले में मुंडन संस्कार के नाम पर श्रद्धालुओं से अतिरिक्त शुल्क वसूले जाने के आरोप लगातार सामने आ रहे हैं। मेला प्रशासन द्वारा निगरानी और तय शुल्क लागू कराने के दावों के बावजूद श्रद्धालुओं ने बिना रसीद अतिरिक्त रकम लेने का आरोप लगाया है।
ताजा मामला सोमवार को सामने आया, जब उत्तर प्रदेश के बरेली और उत्तराखंड के रुद्रपुर से दर्शन और बच्चों का मुंडन संस्कार कराने पहुंचे श्रद्धालुओं ने निर्धारित शुल्क से अधिक पैसे वसूलने की शिकायत की। श्रद्धालुओं का कहना है कि मुंडन के लिए तय 151 रुपये शुल्क के बावजूद उनसे अतिरिक्त रकम ली गई और कई मामलों में रसीद भी नहीं दी गई।
बरेली निवासी श्रद्धालु ध्रुवपाल ने बताया कि उन्होंने अपने एक बच्चे का मुंडन कराया, जिसमें कर्मचारी द्वारा 200 रुपये लेकर टोकन दिया गया। इसके बाद नाई ने नौछावर के नाम पर 100 रुपये अलग से लिए। उन्होंने आरोप लगाया कि कुल 300 रुपये वसूले गए, जबकि निर्धारित शुल्क 151 रुपये था।
ध्रुवपाल के अनुसार, शुल्क संबंधी बैनर ऐसी जगह लगाया गया था जहां श्रद्धालुओं की नजर आसानी से नहीं पड़ सके। उन्होंने कहा कि जब तक उन्हें निर्धारित शुल्क की जानकारी मिलती, तब तक उनसे अतिरिक्त पैसे लिए जा चुके थे।
वहीं रुद्रपुर निवासी श्रद्धालु गंगाधर ने बताया कि उन्होंने अपने दो बच्चों का मुंडन संस्कार कराया। आरोप है कि कर्मचारियों ने 400 रुपये लेकर दो टोकन दिए और बाद में नाई ने नौछावर के नाम पर 200 रुपये अतिरिक्त वसूले। इसके बाद 80 रुपये और मांगे गए। इस तरह उनसे कुल 680 रुपये लिए गए।
गंगाधर ने कहा कि अशिक्षित होने के कारण वे शुल्क संबंधी बोर्ड पढ़ नहीं सके और अतिरिक्त वसूली का शिकार हो गए।
मामले पर मेला मजिस्ट्रेट डॉ. ललित मोहन तिवारी ने कहा कि प्रशासन द्वारा मुंडन स्थल का लगातार निरीक्षण किया जा रहा है और अभी तक अतिरिक्त शुल्क वसूली का कोई मामला आधिकारिक रूप से संज्ञान में नहीं आया है। उन्होंने कहा कि यदि ऐसी शिकायत सामने आती है तो संबंधित ठेकेदार के खिलाफ चालानी कार्रवाई की जाएगी।
गौरतलब है कि कुमाऊं मंडल के चम्पावत जिले में स्थित माँ पूर्णागिरि धाम का यह विशाल मेला 15 जून तक चलेगा। तीन महीने से अधिक समय तक चलने वाले इस मेले में जिला पंचायत द्वारा मुंडन संस्कार का ठेका दिया गया है, जिसमें 151 रुपये शुल्क निर्धारित किया गया था।
इसके बावजूद लगातार सामने आ रही अतिरिक्त वसूली की शिकायतें मेला प्रशासन की निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़े कर रही हैं। अब देखने वाली बात होगी कि प्रशासन इस कथित वसूली पर प्रभावी रोक लगा पाता है या मेला समाप्ति तक श्रद्धालुओं की शिकायतें यूं ही जारी रहती हैं।
