संवाददाता: अरशद हुसैन
पाकिस्तानी कनेक्शन के आरोप में गिरफ्तार की गई रुड़की की शिक्षिका सोनम को लेकर जांच एजेंसियों ने कई अहम खुलासे किए हैं। पुलिस जांच में सामने आया है कि सोनम कथित तौर पर एक ऐसे नेटवर्क का हिस्सा थी, जो गोपनीय तरीके से विभिन्न बैंक खातों में संदिग्ध धनराशि ट्रांसफर कर रहा था।
पुलिस के अनुसार, जम्मू-कश्मीर पुलिस ने सोनम को पाकिस्तानी कनेक्शन और संदिग्ध वित्तीय लेनदेन के आरोप में गिरफ्तार किया था। जांच के दौरान उसके कब्जे से कई एटीएम कार्ड, सिम कार्ड और बैंक पासबुक बरामद किए गए हैं, जिनके आधार पर मामले की गहन जांच की जा रही है।
पूछताछ में सामने आए चौंकाने वाले तथ्य
एसएसपी नवनीत सिंह भुल्लर के मुताबिक, पूछताछ के दौरान सोनम ने स्वीकार किया कि उसने करीब 20 लाख रुपये विभिन्न बैंक खातों में ट्रांसफर किए थे। पुलिस का दावा है कि इन लेनदेन के बदले उसे लगभग दो लाख रुपये कमीशन के रूप में प्राप्त हुए थे।
जांच एजेंसियों के अनुसार, यह धनराशि यूपीआई, एटीएम और बैंक खातों के माध्यम से अलग-अलग स्थानों पर भेजी जाती थी। पुलिस को आशंका है कि इस नेटवर्क का संचालन बेहद सुनियोजित और गोपनीय तरीके से किया जा रहा था।
कठुआ में गिरफ्तार युवक से जुड़ा मामला
जानकारी के अनुसार, जम्मू-कश्मीर के कठुआ में पहले गिरफ्तार किए गए राहुल खान नामक युवक से पूछताछ के दौरान सोनम का नाम सामने आया था। इसके बाद जम्मू-कश्मीर पुलिस की टीम उत्तराखंड पहुंची और कार्रवाई करते हुए उसे हिरासत में लिया।
उमर और हसीन के संपर्क में आने का दावा
जांच एजेंसियों का कहना है कि सोनम अपनी एक मित्र के माध्यम से उमर नामक व्यक्ति के संपर्क में आई थी। बाद में उसकी बातचीत उमर के रिश्तेदार हसीन से कराई गई। पुलिस के मुताबिक, इसके बाद पार्सल के जरिए सोनम तक एटीएम कार्ड, सिम कार्ड और बैंक पासबुक पहुंचाई जाती थीं, जिनका उपयोग संदिग्ध लेनदेन में किया जाता था।
नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की तलाश जारी
पुलिस अब उन सभी बैंक खातों की जांच कर रही है जिनमें संदिग्ध ट्रांजेक्शन हुए हैं। इसके अलावा सोनम के संपर्क में रहे दोस्तों, रिश्तेदारों और अन्य व्यक्तियों की भी जांच की जा रही है।
जांच एजेंसियों का मानना है कि इस नेटवर्क में कई अन्य लोग भी शामिल हो सकते हैं। मामले की गंभीरता को देखते हुए विभिन्न एजेंसियां संयुक्त रूप से जांच में जुटी हुई हैं।
(नोट: मामले की जांच जारी है। अंतिम निष्कर्ष जांच एजेंसियों की रिपोर्ट और न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही स्पष्ट होंगे।)
