रिपोर्टर: सचिन कुमार
देहरादून में आगामी फायर सीजन को देखते हुए वन विभाग ने इस बार पहले से ही व्यापक रणनीति तैयार कर ली है। हर साल गर्मियों में जंगलों में आग की घटनाएं बढ़ जाती हैं, जिससे वन संपदा, वन्यजीवों और पर्यावरण को भारी नुकसान होता है। इसी को ध्यान में रखते हुए विभाग ने इस बार विशेष सतर्कता बरतनी शुरू कर दी है।
संवेदनशील क्षेत्रों की पहचान, बढ़ाई गई निगरानी
वन विभाग ने राज्य के संवेदनशील वन क्षेत्रों की पहचान कर वहां निगरानी और सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत किया है। इन इलाकों में विशेष टीमों की तैनाती की गई है, ताकि किसी भी आग की घटना पर तुरंत काबू पाया जा सके।
फायर वॉचर्स की संख्या में इजाफा
आग की घटनाओं को रोकने के लिए विभाग ने फायर वॉचर्स की तैनाती बढ़ा दी है। साथ ही स्थानीय ग्रामीणों और वन पंचायतों को भी इस अभियान से जोड़ा जा रहा है, ताकि समय रहते आग की सूचना मिल सके और उसे फैलने से रोका जा सके।
तकनीक का बढ़ता इस्तेमाल
इस बार वन विभाग ने आधुनिक तकनीक का सहारा लेते हुए:
- ड्रोन के जरिए निगरानी
- सैटेलाइट के माध्यम से ट्रैकिंग
- कंट्रोल रूम को पूरी तरह सक्रिय
कर दिया है। इससे आग की घटनाओं पर रियल-टाइम नजर रखी जा सकेगी और त्वरित कार्रवाई संभव होगी।
अधिकारियों को अलर्ट मोड पर रखा गया
सभी वन अधिकारियों को अलर्ट मोड पर रखा गया है और सभी डिवीजनों को स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि किसी भी सूचना पर तुरंत कार्रवाई की जाए।
वन मंत्री सुबोध उनियाल का बयान
सुबोध उनियाल ने कहा कि इस बार बेहतर समन्वय और तकनीक के उपयोग से जंगल की आग की घटनाओं को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकेगा। उन्होंने बताया कि विभाग पूरी तरह तैयार है और संवेदनशील क्षेत्रों में विशेष सतर्कता बरती जा रही है।
आग पर नियंत्रण का लक्ष्य
वन विभाग का मुख्य लक्ष्य इस फायर सीजन में जंगलों में आग की घटनाओं को न्यूनतम करना और किसी भी स्थिति में त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित करना है।
