पौड़ी गढ़वाल जिले में गुलदार (तेंदुआ) का आतंक एक बार फिर लोगों की जान पर भारी पड़ गया। कोट ब्लॉक के बालमणा गांव में एक दर्दनाक घटना सामने आई, जहां काम से घर लौट रहे एक राजमिस्त्री पर गुलदार ने हमला कर दिया। इस हमले में उसकी मौके पर ही मौत हो गई।
इस घटना के बाद पूरे इलाके में डर और गुस्से का माहौल बन गया है। ग्रामीणों का कहना है कि जंगल से सटे इलाकों में अब शाम ढलते ही बाहर निकलना खतरे से खाली नहीं है।
गुस्साए ग्रामीणों का प्रदर्शन
घटना से आक्रोशित ग्रामीणों और स्थानीय लोगों ने शहर में रैली निकालकर प्रशासन और वन विभाग के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन किया। बड़ी संख्या में लोग कलेक्ट्रेट पहुंचे और गेट पर धरना देकर अपनी नाराजगी जाहिर की।
प्रदर्शन के दौरान पुलिस प्रशासन भी सतर्क रहा। हेमवती नंदन बहुगुणा की मूर्ति स्थल के पास वाहनों को हटाकर प्रदर्शनकारियों के लिए जगह बनाई गई, ताकि स्थिति नियंत्रण में बनी रहे।
प्रशासन को सौंपा ज्ञापन
प्रदर्शनकारियों ने संयुक्त मजिस्ट्रेट को ज्ञापन सौंपते हुए अपनी समस्याएं सामने रखीं। ग्रामीणों का कहना है कि क्षेत्र में लगातार मानव-वन्यजीव संघर्ष की घटनाएं बढ़ रही हैं, लेकिन वन विभाग इस पर गंभीरता से काम नहीं कर रहा।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि पहले भी कई बार इस तरह की घटनाएं हो चुकी हैं और विरोध भी किया गया, लेकिन प्रशासन ने समय रहते कोई ठोस कदम नहीं उठाया।
क्या हैं ग्रामीणों की मांग?
ग्रामीणों ने प्रशासन से तुरंत कार्रवाई की मांग करते हुए कहा कि:
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गुलदार के आतंक से निपटने के लिए ठोस रणनीति बनाई जाए
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संवेदनशील इलाकों में गश्त बढ़ाई जाए
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वन विभाग की त्वरित प्रतिक्रिया टीम सक्रिय की जाए
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प्रभावित परिवार को उचित मुआवजा दिया जाए
बढ़ता मानव-वन्यजीव संघर्ष बना चिंता
पौड़ी गढ़वाल समेत उत्तराखंड के कई पहाड़ी इलाकों में मानव और वन्यजीवों के बीच टकराव तेजी से बढ़ रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि जंगलों में घटती जगह और भोजन की कमी के कारण जंगली जानवर अब आबादी वाले क्षेत्रों की ओर बढ़ रहे हैं।
अगर समय रहते प्रभावी कदम नहीं उठाए गए, तो ऐसी घटनाएं और बढ़ सकती हैं।
