उत्तराखंड के खटीमा में मानव-वन्यजीव संघर्ष और वनाग्नि की घटनाओं को लेकर जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से एक विशेष मीडिया कार्यशाला का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम सुरई रेंज में तराई पूर्वी वन प्रभाग द्वारा आयोजित किया गया।
कार्यशाला का उद्देश्य
इस कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य आगामी वनाग्नि सीजन और बढ़ती मानव-वन्यजीव संघर्ष की घटनाओं को देखते हुए मीडिया कर्मियों को जागरूक और प्रशिक्षित करना था। कार्यक्रम में मीडिया और वन विभाग के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने पर विशेष जोर दिया गया।
विशेषज्ञों ने दिए महत्वपूर्ण सुझाव
एसडीओ संचिता वर्मा के नेतृत्व में आयोजित इस कार्यक्रम में विशेषज्ञों ने मीडिया की भूमिका को बेहद अहम बताया।
- बायोलॉजिस्ट प्रशांत कुमार
- प्रोजेक्ट एसोसिएट भास्कर जोशी
ने तकनीकी सत्रों के माध्यम से वन्यजीवों के व्यवहार, संघर्ष के कारणों और वनाग्नि से होने वाले नुकसान की विस्तृत जानकारी दी।
संवेदनशील रिपोर्टिंग पर दिया गया जोर
कार्यशाला में बताया गया कि:
- वनाग्नि और वन्यजीव घटनाओं की खबरों को संवेदनशीलता के साथ प्रसारित करना जरूरी है
- अफवाहों को रोकना और सटीक जानकारी देना मीडिया की जिम्मेदारी है
- सही सूचना से जनहानि और नुकसान को कम किया जा सकता है
वन्यजीव सुरक्षा और रेस्क्यू पर प्रशिक्षण
बायोलॉजिस्ट प्रशांत कुमार ने मीडिया कर्मियों को वन्यजीवों के रेस्क्यू ऑपरेशन, सुरक्षा प्रोटोकॉल और आपातकालीन स्थिति में अपनाई जाने वाली सावधानियों के बारे में विस्तार से जानकारी दी।
क्या बोलीं अधिकारी?
एसडीओ संचिता वर्मा ने कहा कि मीडिया समाज का आईना है और संकट के समय सही जानकारी का प्रसार बेहद जरूरी होता है। उन्होंने कहा कि इस तरह के संवाद कार्यक्रमों से वन विभाग और मीडिया के बीच बेहतर तालमेल स्थापित होगा।
