लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी का प्रस्तावित उत्तराखंड दौरा खराब मौसम के कारण स्थगित होने के बाद प्रदेश की राजनीति गरमा गई है। राहुल गांधी को अल्मोड़ा और पौड़ी में आयोजित कार्यक्रमों में शामिल होना था, लेकिन खराब मौसम के चलते उनका हेलिकॉप्टर उड़ान नहीं भर सका, जिसके बाद पूरा कार्यक्रम रद्द करना पड़ा।
दौरा स्थगित होने के बाद कांग्रेस और भाजपा के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हो गया है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने इस मामले में कई सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने कहा कि जिस रूट पर अन्य सिंगल इंजन हेलिकॉप्टर उड़ान भर रहे थे, वहां राहुल गांधी का डबल इंजन हेलिकॉप्टर क्यों नहीं उड़ पाया।
हरीश रावत ने यूकाडा (UCADA), डीजीसीए (DGCA) और संबंधित हेलिकॉप्टर कंपनी से जवाब मांगते हुए कहा कि देश के नेता प्रतिपक्ष के हेलिकॉप्टर को उड़ान की अनुमति क्यों नहीं मिली। उन्होंने इस पूरे मामले की स्पष्ट जानकारी सार्वजनिक करने की मांग की।
वहीं भारतीय जनता पार्टी ने कांग्रेस के आरोपों को पूरी तरह निराधार बताया है। भाजपा प्रदेश मंत्री गौरव पांडे ने पलटवार करते हुए कहा कि कांग्रेस राजनीतिक लाभ के लिए हर मुद्दे को विवाद का रूप देने की कोशिश कर रही है।
उन्होंने कहा कि पूरे प्रदेश में मौसम विभाग द्वारा येलो और ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया था। ऐसे में सुरक्षा मानकों और विमानन नियमों का पालन करना जरूरी था। गौरव पांडे के अनुसार कैबिनेट मंत्री, मुख्यमंत्री और नेता प्रतिपक्ष जैसे संवैधानिक पदों पर बैठे लोगों के लिए डबल इंजन हेलिकॉप्टर का उपयोग किया जाता है और उनकी उड़ान से जुड़े सुरक्षा मानक अधिक कड़े होते हैं।
भाजपा नेता ने कहा कि यूकाडा और अन्य विमानन एजेंसियों ने पूरी तरह से निर्धारित गाइडलाइन का पालन किया है। उन्होंने हरीश रावत पर हर मुद्दे को राजनीतिक रंग देने का आरोप लगाते हुए कहा कि सुरक्षा और मौसम से जुड़े विषयों को राजनीति का माध्यम नहीं बनाया जाना चाहिए।
राहुल गांधी का कार्यक्रम स्थगित होने के बाद अब कांग्रेस नए कार्यक्रम की तारीख तय करने की तैयारी में जुटी है। वहीं हेलिकॉप्टर उड़ान को लेकर उठे सवालों ने उत्तराखंड की राजनीति में नई बहस छेड़ दी है।
राजनीतिक गलियारों में चर्चा तेज
राहुल गांधी के दौरे को लेकर कांग्रेस कार्यकर्ताओं में काफी उत्साह था। कार्यक्रम रद्द होने से जहां कार्यकर्ताओं में निराशा है, वहीं भाजपा और कांग्रेस के बीच शुरू हुई बयानबाजी ने इस पूरे घटनाक्रम को राजनीतिक रंग दे दिया है। आने वाले दिनों में यह मुद्दा प्रदेश की राजनीति में और अधिक चर्चा का विषय बन सकता है।
