कॉर्बेट लैंडस्केप अपनी समृद्ध जैव विविधता के लिए देशभर में जाना जाता है। इसी कड़ी में रामनगर से वर्षों बाद दुर्लभ कॉमन सैंड बोआ मिलने की खबर सामने आई है, जिसने वन्यजीव विशेषज्ञों का ध्यान अपनी ओर आकर्षित किया है।
वन विभाग की रेस्क्यू टीम ने इस सांप को आबादी वाले क्षेत्र से सुरक्षित निकाला। विशेषज्ञों का कहना है कि यह दुर्लभ प्रजाति पर्यावरण के लिए बेहद महत्वपूर्ण है और इसकी मौजूदगी स्वस्थ पारिस्थितिकी तंत्र का संकेत मानी जाती है।
कॉमन सैंड बोआ के बारे में सबसे बड़ी गलतफहमी इसका ‘दोमुंहा सांप’ कहलाना है। वास्तव में इसकी पूंछ सिर जैसी दिखती है, जिससे शिकारी भ्रमित हो जाते हैं। यह प्रकृति द्वारा दिया गया एक अनोखा रक्षा तंत्र है।
वन विभाग ने स्पष्ट किया कि यह सांप जहरीला नहीं होता और इंसानों के लिए किसी प्रकार का खतरा पैदा नहीं करता। इसके बावजूद अज्ञानता के कारण कई बार लोग इसे नुकसान पहुंचा देते हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि लोगों में जागरूकता बढ़ाकर इस दुर्लभ प्रजाति का संरक्षण किया जा सकता है। वन विभाग ने भी नागरिकों से वन्यजीव संरक्षण में सहयोग की अपील की है।
