देहरादून। उत्तराखंड के ज्योतिर्मठ (जोशीमठ) में भूधंसाव के बाद चल रहे पुनर्वास और पुनर्निर्माण कार्यों की प्रगति की समीक्षा राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (एनडीएमए) ने की। समीक्षा बैठक में प्रभावित परिवारों के पुनर्वास, मुआवजा वितरण और बुनियादी ढांचे के विकास कार्यों को तय समयसीमा के भीतर गुणवत्ता और पारदर्शिता के साथ पूरा करने पर विशेष जोर दिया गया।
देहरादून स्थित राज्य आपातकालीन परिचालन केंद्र में आयोजित बैठक में राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (एनडीएमए) की सदस्य रीता मिस्सल और दिनेश कुमार असवाल ने अधिकारियों के साथ पुनर्वास कार्यों की विस्तृत समीक्षा की। उन्होंने निर्देश दिए कि सभी परियोजनाओं को निर्धारित समय में पूरा किया जाए और प्रत्येक स्तर पर पारदर्शिता सुनिश्चित की जाए।
बैठक में भूधंसाव से प्रभावित परिवारों के पुनर्वास, मुआवजा वितरण और आजीविका से जुड़े कार्यक्रमों की प्रगति पर विस्तार से चर्चा हुई। एनडीएमए ने अधिकारियों से कहा कि स्थानीय लोगों की सहभागिता बढ़ाई जाए और पात्र प्रभावितों को मुआवजा शीघ्र उपलब्ध कराया जाए, ताकि पुनर्वास प्रक्रिया में किसी प्रकार की देरी न हो।
भूधंसाव की स्थिति पर लगातार नजर बनाए रखने के लिए आधुनिक मॉनिटरिंग सिस्टम स्थापित करने के भी निर्देश दिए गए। इससे क्षेत्र की भू-वैज्ञानिक गतिविधियों की निगरानी और संभावित जोखिमों का समय रहते आकलन किया जा सकेगा।
बैठक में आपदा प्रबंधन सचिव विनोद कुमार सुमन ने बताया कि ज्योतिर्मठ पुनरुत्थान परियोजना के लिए केंद्र सरकार से प्राप्त पहली किश्त के तहत ढाल स्थिरीकरण, टो प्रोटेक्शन, सीवर नेटवर्क और ड्रेनेज व्यवस्था सहित कई महत्वपूर्ण कार्य तेजी से किए जा रहे हैं।
वहीं, चमोली प्रशासन ने जानकारी दी कि भूधंसाव के कारण असुरक्षित घोषित 55 भवनों को ध्वस्त करने की कार्रवाई शुरू कर दी गई है। अधिकारियों ने कहा कि पुनर्निर्माण के लिए स्वीकृत धनराशि का प्रभावी और समयबद्ध उपयोग सुनिश्चित किया जा रहा है, ताकि प्रभावित लोगों को जल्द से जल्द सुरक्षित आवास और आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराई जा सकें।
रिपोर्टर: सचिन कुमार
