आजादी के 78 वर्ष बाद भी चमोली जिले के विकासखंड देवाल का दूरस्थ ऐरठा गांव सड़क सुविधा से वंचित है। सड़क न होने के कारण यहां के ग्रामीणों को रोजमर्रा की जिंदगी में भारी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। सबसे अधिक दिक्कत बीमार, बुजुर्ग और गर्भवती महिलाओं को होती है, जिन्हें अस्पताल पहुंचाने के लिए आज भी पारंपरिक डंडी-कंडी का सहारा लेना पड़ता है।
रविवार सुबह करीब 9 बजे ऐरठा गांव निवासी गमोती देवी (34 वर्ष), पत्नी पानीराम टम्टा को अचानक प्रसव पीड़ा शुरू हो गई। गांव में सड़क सुविधा न होने के कारण ग्रामीणों ने महिला को डंडी-कंडी के सहारे करीब 5 किलोमीटर पैदल मुख्य सड़क तक पहुंचाया। इसके बाद वाहन की मदद से उन्हें प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र देवाल ले जाया गया, जहां उन्होंने एक स्वस्थ नवजात शिशु को जन्म दिया। चिकित्सकों के अनुसार जच्चा और बच्चा दोनों सुरक्षित हैं।
सामाजिक कार्यकर्ता राजेंद्र कुमार ने बताया कि यह कोई पहली घटना नहीं है। इससे पहले भी कई बार गर्भवती महिलाओं, बीमारों, बुजुर्गों और घायल व्यक्तियों को अस्पताल पहुंचाने के लिए ग्रामीणों को कठिन परिस्थितियों का सामना करना पड़ा है। उन्होंने कहा कि वर्ष 2021 में पदमल्ला-कंजरू-ऐरठा-ऑडर मोटर मार्ग को स्वीकृति मिल चुकी थी। इतना ही नहीं, लगभग एक वर्ष पहले पीएमजीएसवाई विभाग द्वारा सड़क का सर्वेक्षण भी किया जा चुका है, लेकिन निर्माण कार्य अब तक शुरू नहीं हो पाया।
राजेंद्र कुमार के अनुसार, ग्राम पंचायत ऑडर के अंतर्गत आने वाला ऐरठा गांव अनुसूचित जाति बाहुल्य क्षेत्र है, जहां लगभग 60 परिवार और 250 से अधिक लोग निवास करते हैं। सड़क सुविधा के अभाव में ग्रामीणों को शिक्षा, स्वास्थ्य और अन्य बुनियादी सुविधाओं तक पहुंचने में लगातार कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।
ग्राम प्रधान प्रेमा देवी सहित कई ग्रामीणों ने शासन-प्रशासन और संबंधित विभागों से शीघ्र सड़क निर्माण कार्य शुरू करने की मांग की है। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द सड़क निर्माण शुरू नहीं किया गया, तो वे वर्ष 2027 के विधानसभा चुनाव का बहिष्कार करने पर मजबूर होंगे।
ग्रामीणों का कहना है कि विकास के बड़े-बड़े दावों के बावजूद ऐरठा गांव आज भी मूलभूत सुविधाओं से वंचित है और सड़क जैसी आवश्यक सुविधा के लिए वर्षों से इंतजार कर रहा है।
