देहरादून: उत्तराखंड की राजधानी देहरादून स्थित लोकभवन में एक महत्वपूर्ण उच्च स्तरीय रणनीतिक बैठक आयोजित की गई, जिसमें तेजी से बदलते वैश्विक परिदृश्य और उभरती सुरक्षा चुनौतियों पर गंभीर चर्चा हुई। बैठक की अध्यक्षता गुरमीत सिंह ने की।
इस दौरान विशेषज्ञों और वरिष्ठ अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि आने वाले समय में युद्ध का स्वरूप पूरी तरह बदलने वाला है। अब लड़ाई सिर्फ सीमाओं तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि साइबर स्पेस, आर्थिक मोर्चे और तकनीकी क्षेत्र भी उतने ही अहम होंगे।
बदलती दुनिया, बदलती रणनीति
बैठक में इस बात पर जोर दिया गया कि वैश्विक स्तर पर तेजी से हो रहे बदलावों के बीच भारत और राज्यों को अपनी सुरक्षा रणनीति को और मजबूत करना होगा।
विशेषज्ञों ने कहा:
“भविष्य के युद्ध बहुआयामी होंगे — जहां हथियारों के साथ-साथ डेटा और तकनीक भी अहम भूमिका निभाएंगे।”
साइबर खतरे और आधुनिक युद्ध तकनीक पर फोकस
बैठक का एक बड़ा हिस्सा साइबर सुरक्षा और आधुनिक युद्ध तकनीकों पर केंद्रित रहा।
- डिजिटल हमलों का खतरा लगातार बढ़ रहा है
- डेटा सुरक्षा अब राष्ट्रीय सुरक्षा का हिस्सा बन चुकी है
- आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और ड्रोन तकनीक युद्ध की दिशा तय कर रहे हैं
विशेषज्ञों ने चेतावनी दी कि साइबर हमले भविष्य में सबसे बड़ा खतरा बन सकते हैं, इसलिए मजबूत डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार करना बेहद जरूरी है।
ऊर्जा सुरक्षा भी बनी बड़ी चिंता
बैठक में ऊर्जा सुरक्षा को भी प्रमुख मुद्दे के रूप में उठाया गया।
- बिजली और ऊर्जा संसाधनों की निर्भरता
- वैश्विक संकटों का सप्लाई पर असर
- वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों की जरूरत
इन सभी बिंदुओं पर विस्तार से चर्चा की गई और दीर्घकालिक रणनीति बनाने पर जोर दिया गया।
व्यापक तैयारी की जरूरत
राज्यपाल गुरमीत सिंह ने कहा कि मौजूदा समय में सुरक्षा को केवल पारंपरिक नजरिए से नहीं देखा जा सकता।
“हमें हर स्तर पर तैयार रहना होगा — चाहे वह सीमा सुरक्षा हो, साइबर स्पेस हो या आर्थिक मोर्चा।”
उन्होंने सभी संबंधित एजेंसियों को समन्वय के साथ काम करने और भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार रहने के निर्देश दिए।
