देहरादून: उत्तराखंड की राजधानी देहरादून सहित प्रदेश के कई जिलों में हाल ही में लोगों को ऑनलाइन गैस सिलेंडर बुकिंग के दौरान तकनीकी दिक्कतों का सामना करना पड़ा। इस समस्या के कारण कई जगहों पर गैस सिलेंडर की उपलब्धता को लेकर भ्रम की स्थिति बन गई थी। हालांकि प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि यह केवल तकनीकी समस्या थी और अब इसे काफी हद तक ठीक कर लिया गया है।
ऑनलाइन बुकिंग में आई तकनीकी समस्या
पिछले कुछ दिनों में कई उपभोक्ताओं ने शिकायत की कि उन्हें एलपीजी सिलेंडर की ऑनलाइन बुकिंग करते समय परेशानी हो रही है। कुछ लोगों की बुकिंग प्रक्रिया पूरी नहीं हो पा रही थी, जबकि कुछ मामलों में बुकिंग की पुष्टि नहीं मिल रही थी। इस कारण लोगों के बीच यह आशंका फैलने लगी कि कहीं गैस सिलेंडर की कमी तो नहीं हो गई है।
प्रशासन के अनुसार यह समस्या गैस कंपनियों की ऑनलाइन बुकिंग प्रणाली में आई तकनीकी गड़बड़ी के कारण हुई थी। फिलहाल इसे ठीक करने के लिए तकनीकी टीम लगातार काम कर रही है और अधिकतर जगहों पर बुकिंग प्रक्रिया सामान्य हो चुकी है।
सरकार और प्रशासन अलर्ट मोड में
राज्य सरकार और जिला प्रशासन ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए स्थिति पर लगातार नजर बनाए रखी है। अधिकारियों का कहना है कि गैस कंपनियों के साथ समन्वय कर यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि किसी भी जिले में एलपीजी सिलेंडर की आपूर्ति प्रभावित न हो।
जरूरत पड़ने पर अतिरिक्त सिलेंडर की सप्लाई भी उपलब्ध कराई जाएगी ताकि उपभोक्ताओं को किसी तरह की परेशानी न हो।
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट का बयान
इस मामले पर भाजपा प्रदेश अध्यक्ष Mahendra Bhatt ने कहा कि वैश्विक स्तर पर ऊर्जा को लेकर चुनौतियां जरूर हैं, लेकिन भारत में गैस की आपूर्ति पूरी तरह सामान्य है। उन्होंने कहा कि एलपीजी सिलेंडर की सप्लाई देशभर में नियमित रूप से जारी है और उपभोक्ताओं को घबराने की कोई जरूरत नहीं है।
महेंद्र भट्ट ने यह भी बताया कि कुछ उपभोक्ताओं को ऑनलाइन बुकिंग के दौरान तकनीकी समस्या का सामना करना पड़ा था, लेकिन अब इन समस्याओं को तेजी से ठीक किया जा रहा है।
लोगों से अपील – घबराएं नहीं
राज्य सरकार और प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि गैस सिलेंडर को लेकर घबराने या अनावश्यक रूप से स्टॉक करने की जरूरत नहीं है। प्रदेश में पर्याप्त मात्रा में एलपीजी उपलब्ध है और नियमित रूप से आपूर्ति की जा रही है।
ऊर्जा विशेषज्ञों का भी मानना है कि अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों के बावजूद भारत ने ऊर्जा आपूर्ति को स्थिर बनाए रखने के लिए कई वैकल्पिक व्यवस्थाएं की हैं। इससे आम उपभोक्ताओं को ज्यादा परेशानी होने की संभावना नहीं है।
