मसूरी में स्वच्छता व्यवस्था पर फिर उठे सवाल, निरीक्षण में मिली अनियमितताएं
मसूरी की स्वच्छता व्यवस्था एक बार फिर चर्चा के केंद्र में है। शहरी विकास निदेशक विनोद गोस्वामी ने एमआरएफ सेंटर और बायोमेथिन प्लांट का निरीक्षण किया, जहां विभिन्न अनियमितताएं पाए जाने पर प्लांट का संचालन कर रही कंपनी पर 10-10 हजार रुपये का जुर्माना लगाया गया। निरीक्षण के दौरान सामने आई कमियों ने नगर पालिका और ठेके पर कार्य कर रही कंपनी की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय स्तर पर यह चर्चा तेज हो गई है कि स्वच्छता व्यवस्था पर खर्च बढ़ने के बावजूद अपेक्षित सुधार देखने को नहीं मिल रहा है।
जानकारों का कहना है कि पहले शहर की सफाई व्यवस्था का कार्य अपेक्षाकृत कम लागत में संचालित किया जाता था, जबकि वर्तमान में खर्च बढ़ने के बावजूद कई क्षेत्रों में कूड़े के ढेर और सफाई संबंधी शिकायतें लगातार सामने आ रही हैं। सोशल मीडिया और स्थानीय मंचों पर भी समय-समय पर स्वच्छता व्यवस्था को लेकर लोगों की नाराजगी दिखाई देती रही है। स्थानीय नागरिकों का मानना है कि मसूरी जैसे पर्यटन नगर की पहचान उसकी स्वच्छता और प्राकृतिक सुंदरता से जुड़ी हुई है। ऐसे में सफाई व्यवस्था में किसी भी प्रकार की लापरवाही शहर की छवि को प्रभावित कर सकती है। लोगों ने नगर पालिका और संबंधित एजेंसियों से जवाबदेही तय करने और व्यवस्था में सुधार लाने की मांग की है।
हालांकि, कंपनी और नगर पालिका की ओर से इस मामले में विस्तृत प्रतिक्रिया सामने आना अभी बाकी है। निरीक्षण के बाद जुर्माना लगाए जाने को स्वच्छता व्यवस्था में सुधार की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
