रिपोर्टर: सचिन कुमार
देहरादून: उत्तराखंड सरकार ने प्राकृतिक संसाधनों के बेहतर उपयोग की दिशा में एक और महत्वपूर्ण कदम उठाया है। राज्य में जियोथर्मल एनर्जी पॉलिसी 2025 लागू कर दी गई है, जिसके तहत हिमालयी क्षेत्रों में मौजूद गर्म जल स्रोतों को ऊर्जा उत्पादन और अन्य उपयोगों के लिए विकसित किया जाएगा।
सरकार ने इस दिशा में पहला कदम चमोली जिले के तपोवन क्षेत्र से उठाया है, जहां 10 मेगावाट क्षमता की पायलट परियोजना के लिए सर्वे और अन्वेषण कार्य शुरू हो चुका है। इस परियोजना से यह आकलन किया जाएगा कि क्षेत्र में जियोथर्मल ऊर्जा उत्पादन की कितनी संभावनाएं मौजूद हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार, जियोथर्मल ऊर्जा एक स्वच्छ और नवीकरणीय ऊर्जा स्रोत है, जिससे बिना बड़े पर्यावरणीय नुकसान के बिजली और अन्य सेवाएं प्राप्त की जा सकती हैं। यह तकनीक भविष्य में ऊर्जा संकट से निपटने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।
उत्तराखंड सरकार का लक्ष्य प्राकृतिक संसाधनों का संतुलित उपयोग करते हुए राज्य को ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाना है। इसके साथ ही स्थानीय लोगों के लिए रोजगार, पर्यटन और उद्योगों को भी नई गति मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।
बीजेपी प्रदेश प्रवक्ता हनी पाठक ने कहा कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में राज्य लगातार नई तकनीकों को अपनाने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। उनका विश्वास है कि यह परियोजना उत्तराखंड के विकास में नई ऊर्जा लेकर आएगी।
