रिपोर्ट: सचिन कुमार
ऑनलाइन दवा बिक्री और ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म के बढ़ते प्रभाव के खिलाफ बुधवार को उत्तराखंड समेत पूरे देश में मेडिकल स्टोर संचालकों ने एक दिवसीय हड़ताल की। ऑल इंडिया ऑर्गनाइजेशन ऑफ केमिस्ट्स एंड ड्रगिस्ट्स (AIOCD) और उत्तराखंड औषधि व्यवसायी महासंघ के आह्वान पर दवा व्यापारियों ने अपने प्रतिष्ठान बंद रखकर विरोध प्रदर्शन किया।
दवा व्यापारियों का कहना है कि ई-फार्मेसी और क्विक डिलीवरी प्लेटफॉर्म बिना पर्याप्त निगरानी और नियमों के दवाओं की बिक्री कर रहे हैं, जिससे मरीजों की सुरक्षा पर गंभीर खतरा पैदा हो रहा है। उनका कहना है कि दवाएं सामान्य उपभोक्ता वस्तु नहीं हैं, बल्कि सीधे लोगों के स्वास्थ्य और जीवन से जुड़ी होती हैं। ऐसे में इनके वितरण और बिक्री पर सख्त नियंत्रण बेहद जरूरी है।
केमिस्ट संगठनों ने आरोप लगाया कि कई ऑनलाइन प्लेटफॉर्म डॉक्टर के पर्चे की पर्याप्त जांच किए बिना दवाओं की बिक्री कर रहे हैं। इससे एंटीबायोटिक दवाओं के दुरुपयोग, नशीली दवाओं की अनियंत्रित उपलब्धता और गलत दवा सेवन जैसी समस्याएं बढ़ सकती हैं।
व्यापारियों का कहना है कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की मदद से फर्जी प्रिस्क्रिप्शन तैयार किए जाने और ऑनलाइन परामर्श के नाम पर भ्रामक गतिविधियों की शिकायतें भी सामने आ रही हैं। उनका दावा है कि कई मामलों में एक ही पर्चे का बार-बार इस्तेमाल कर दवाएं खरीदी जा रही हैं, जिससे दवा वितरण व्यवस्था की विश्वसनीयता प्रभावित हो रही है।
संगठन ने केंद्र सरकार से ऑनलाइन दवा बिक्री पर प्रभावी नियंत्रण लगाने, GSR 817 और कोविड काल में लागू GSR 220 को वापस लेने, ई-कॉमर्स कंपनियों द्वारा दी जा रही भारी छूट पर रोक लगाने तथा फार्मासिस्ट की पेशेवर भूमिका को सुरक्षित रखने की मांग की है।
दवा व्यापारियों ने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों पर जल्द सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया तो आने वाले समय में आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा।
