Champawat में 16 वर्षीय नाबालिग से जुड़े गंभीर मामले के बाद वीडियो वायरल होने पर Uttarakhand State Commission for Protection of Child Rights की अध्यक्ष Dr Geeta Khanna ने कड़ी नाराजगी जताई है।
डॉ. गीता खन्ना ने स्पष्ट कहा कि किसी भी संवेदनशील मामले में वीडियो को साक्ष्य के रूप में सुरक्षित रखना अलग बात है, लेकिन उसे सोशल मीडिया पर वायरल करना गैरकानूनी और पूरी तरह अनैतिक है।
उन्होंने चेतावनी दी कि ऐसा करने वालों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई भी की जा सकती है।
बाल आयोग अध्यक्ष ने आम लोगों से अपील करते हुए कहा कि अगर इस तरह का कोई वीडियो उनके पास पहुंचता है तो उसे किसी भी स्थिति में फॉरवर्ड न करें।
उन्होंने कहा कि इस तरह की सामग्री साझा करना न केवल पीड़ित की गोपनीयता का उल्लंघन है, बल्कि कानून का भी सीधा उल्लंघन है।
उन्होंने यह भी कहा कि सोशल मीडिया का उपयोग करते समय लोगों को अधिक जिम्मेदार बनना होगा, खासकर तब जब मामला किसी नाबालिग से जुड़ा हो।
इस तरह की घटनाएं समाज में गलत संदेश देती हैं और पीड़ित के मानसिक स्वास्थ्य पर भी गंभीर प्रभाव डालती हैं।
नाबालिगों से जुड़े मामलों में संवेदनशीलता और जिम्मेदारी बेहद जरूरी है। प्रशासन और बाल आयोग लगातार लोगों से अपील कर रहे हैं कि ऐसी किसी भी सामग्री को साझा करने से बचें और कानून का पालन करें।
