रुड़की के एक सरकारी अस्पताल से सामने आए वीडियो ने स्वास्थ्य सेवाओं और अस्पताल परिसर में निजी एम्बुलेंस संचालकों की गतिविधियों को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहे वीडियो में एक मरीज को निजी एम्बुलेंस में ले जाने को लेकर कथित तौर पर विवाद और तीमारदारों के साथ बहस होती दिखाई दे रही है।
वीडियो के सामने आने के बाद अस्पताल परिसर में निजी एम्बुलेंस संचालकों और कथित एजेंटों की भूमिका पर चर्चा तेज हो गई है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि सरकारी अस्पतालों में आने वाले मरीजों को निजी अस्पतालों में ले जाने के लिए कुछ लोग सक्रिय रहते हैं, जिससे मरीजों और उनके परिजनों को परेशानियों का सामना करना पड़ता है।
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि सरकारी अस्पतालों में इलाज के लिए आने वाले मरीजों को कई बार निजी अस्पतालों में रेफर कराने या ले जाने के प्रयास किए जाते हैं। उनका आरोप है कि अस्पताल परिसर में निजी एम्बुलेंस संचालकों और बिचौलियों की गतिविधियों पर प्रभावी निगरानी नहीं होने के कारण ऐसी घटनाएं सामने आती रहती हैं। मामले के सामने आने के बाद अस्पताल प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठने लगे हैं। लोगों का कहना है कि यदि अस्पताल परिसर में इस प्रकार की घटनाएं हो रही हैं तो सुरक्षा व्यवस्था और निगरानी प्रणाली को और मजबूत किए जाने की आवश्यकता है।
हालांकि वीडियो वायरल होने के बाद संबंधित अधिकारियों की ओर से मामले की जांच की संभावना जताई जा रही है। अभी तक प्रशासन की ओर से इस संबंध में कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। स्थानीय लोगों ने मांग की है कि वायरल वीडियो की निष्पक्ष जांच कराई जाए और यदि किसी प्रकार की अनियमितता या दबाव बनाकर मरीजों को निजी अस्पतालों में ले जाने की कोशिश की गई है तो संबंधित लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए।
