रिपोर्टर: भगवान सिंह
गढ़वाल मंडल मुख्यालय पौड़ी से इस वक्त की बड़ी खबर सामने आ रही है, जहां उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री बीसी खंडूड़ी के निधन से पूरे क्षेत्र में शोक की लहर है। मुख्यालय पौड़ी से लेकर उनके पैतृक गांव राधा बल्लभपुरम (मरगदना) तक हर घर-आंगन सूना नजर आ रहा है।
मंगलवार का दिन पौड़ी वासियों के लिए बेहद दुखद साबित हुआ। पौड़ी के लाल और पूर्व मुख्यमंत्री बीसी खंडूड़ी के निधन की खबर मिलते ही पूरे क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई।
पौड़ी स्थित विकास मार्ग पर उनका आवास सूना पड़ा है, वहीं उनके पैतृक गांव राधा बल्लभपुरम (मरगदना) में भी हर घर में मायूसी छाई हुई है।
ग्रामीण राजेश्वरी देवी खंडूड़ी ने बताया कि खंडूड़ी जी का अपने गांव से बेहद लगाव था। वह हमेशा ग्रामीणों की मदद के लिए आगे रहते थे।
उन्होंने बताया कि उनका पैतृक घर वर्ष 1994-95 में जंगल की आग में जल गया था, जिसके बाद उन्होंने वहां भव्य मां गौरा देवी मंदिर का निर्माण कराया।
राजेश्वरी देवी ने एक भावुक किस्सा साझा करते हुए बताया कि जब उनका बच्चा बीमार हुआ तो खंडूड़ी जी ने खुद उसे खाना खिलाया और दवाई दी।
ग्रामीण आनंद सिंह सजवाण ने बताया कि उनके पूर्वजों को भी खंडूड़ी परिवार ने गांव में बसाया था। आज गांव में कई परिवार उनकी दी हुई भूमि पर ही रह रहे हैं।
उन्होंने कहा कि खंडूड़ी जी के निधन से पूरा गांव शोकाकुल है।
खंडूड़ी जी के नाती सुनील खंडूड़ी ने कहा कि उनके दादा ने अपने कार्यों से देश और दुनिया में गांव और क्षेत्र का नाम रोशन किया।
उन्होंने कहा कि परिवार को हमेशा उन पर गर्व रहेगा।
नगर पालिका श्रीनगर के पूर्व अध्यक्ष कृष्णानंद मैठाणी ने खंडूड़ी जी के साथ अपने गहरे रिश्तों को याद किया।
उन्होंने बताया कि उनका परिवार हिमालय पुत्र हेमवती नंदन बहुगुणा से जुड़ा रहा और इसी कारण खंडूड़ी परिवार से भी गहरा संबंध बना।
मैठाणी ने बताया कि उनके बड़े भाई और बीसी खंडूड़ी ने साथ पढ़ाई की और बचपन में साथ नाटक देखने जाया करते थे।
कृष्णानंद मैठाणी ने कहा कि श्रीनगर के विकास में हेमवती नंदन बहुगुणा के बाद अगर किसी का सबसे बड़ा योगदान रहा तो वह बीसी खंडूड़ी का है।
उन्होंने मेडिकल कॉलेज की स्थापना, एसएसबी अकादमी में आईजी पद सृजन, थाना श्रीनगर को कोतवाली में अपग्रेड करने और रोडवेज डिपो की स्थापना जैसे कई बड़े कार्य कराए।
पूर्व मुख्यमंत्री बीसी खंडूड़ी के निधन से न केवल उत्तराखंड बल्कि उनके पैतृक क्षेत्र पौड़ी में एक अभिभावक का साया उठ गया है। उनकी सादगी, ईमानदारी और जनसेवा की छवि हमेशा लोगों के दिलों में जीवित रहेगी।
