पौड़ी जनपद के विकासखंड कोट में हुई एक दर्दनाक घटना ने स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। विकासखंड कार्यालय में कार्यरत सरकारी कर्मचारी भरत भंडारी अज्ञात कारणों से लगी आग में करीब 75 प्रतिशत तक झुलस गए थे।
घटना के तुरंत बाद उन्हें जिला अस्पताल पौड़ी ले जाया गया, जहां प्राथमिक उपचार के बाद उनकी गंभीर हालत को देखते हुए एम्स ऋषिकेश रेफर कर दिया गया।
परिजनों के अनुसार, एम्स ऋषिकेश पहुंचने पर भरत भंडारी को तत्काल बेड उपलब्ध नहीं हो सका, जिससे उनका इलाज शुरू नहीं हो पाया। बाद में उन्हें जॉली ग्रांट अस्पताल ले जाया जा रहा था, लेकिन दुर्भाग्यवश रास्ते में ही उन्होंने दम तोड़ दिया।
इस घटना ने आपातकालीन चिकित्सा व्यवस्था और रेफरल प्रक्रिया की खामियों को उजागर कर दिया है।
सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि जब मरीज की हालत बेहद गंभीर थी और उसे एम्स रेफर किया गया था, तो क्या जिला अस्पताल प्रशासन ने पहले से एम्स से संपर्क कर बेड की उपलब्धता सुनिश्चित की थी या नहीं।
यदि ऐसा नहीं किया गया, तो यह एक गंभीर प्रशासनिक लापरवाही मानी जा रही है।
मामले को गंभीरता से लेते हुए जिलाधिकारी ने स्पष्ट किया है कि किसी भी गंभीर मरीज को रेफर करने से पहले संबंधित अस्पताल से समन्वय स्थापित करना अनिवार्य है।
उन्होंने कहा कि यदि जांच में किसी भी स्तर पर लापरवाही पाई जाती है, तो संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
भरत भंडारी की मौत ने एक बार फिर स्वास्थ्य सेवाओं की तैयारियों और रेफरल सिस्टम की कमजोरियों को सामने ला दिया है। अब सभी की निगाहें जांच और प्रशासनिक कार्रवाई पर टिकी हैं।
